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कालजयी कहानियाँ "बूढ़ी काकी"

  बूढ़ी काकी बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है। बूढ़ी काकी में जिह्वा-स्वाद के सिवा और कोई चेष्टा शेष न थी और न अपने कष्टों की ओर आकर्षित करने का, रोने के अतिरिक्त कोई दूसरा सहारा ही। समस्त इन्द्रियाँ, नेत्र, हाथ और पैर जवाब दे चुके थे। पृथ्वी पर पड़ी रहतीं और घर वाले कोई बात उनकी इच्छा के प्रतिकूल करते, भोजन का समय टल जाता या उसका परिणाम पूर्ण न होता अथवा बाज़ार से कोई वस्तु आती और न मिलती तो ये रोने लगती थीं। उनका रोना-सिसकना साधारण रोना न था, वे गला फाड़-फाड़कर रोती थीं। उनके पतिदेव को स्वर्ग सिधारे कालांतर हो चुका था। बेटे तरुण हो-होकर चल बसे थे। अब एक भतीजे के अलावा और कोई न था। उसी भतीजे के नाम उन्होंने अपनी सारी सम्पत्ति लिख दी। भतीजे ने सारी सम्पत्ति लिखाते समय ख़ूब लम्बे-चौड़े वादे किए, किन्तु वे सब वादे केवल कुली-डिपो के दलालों के दिखाए हुए सब्ज़बाग थे। यद्यपि उस सम्पत्ति की वार्षिक आय डेढ़-दो सौ रुपए से कम न थी तथापि बूढ़ी काकी को पेट भर भोजन भी कठिनाई से मिलता था। इसमें उनके भतीजे पंडित बुद्धिराम का अपराध था अथवा उनकी अर्धांगिनी श्रीमती रूपा का, इसका निर्णय करन...

कफन

कफन Timeless टाइमलेस कालजयी रचना कौन सी होती है? बहुत बहुत सीधा सा अर्थ है  जिस पर समय की धूल न जमी बरसो बरसो गुजर जाने के बाद भी कहीं से पुरानी ना लगे,1936 में पहली बार मुंशी प्रेमचंद की एक शॉर्ट स्टोरीज पब्लिश हुई थी जामिया में, जिसका नाम था कफन, कफन 1936 में पहली बार सुनी गई पढ़ी गई और इस वक्त 2021 में पचासी साल गुजर जाने के बाद भी उतनी रिलेवेंट है,उतनी ही प्रसांगिक है उतनी ही चुभती भी है । और यही वजह है कि मैंने यह किताब पढ़ा और आपके सामने इसके बारे में बताना चाहता हूं । एक बात मैं आपको रिक्वेस्ट करूंगा कि कफन का जो युग है वह हमारे और आपके समय से बहुत बहुत पुरानी है । हम मे ज्यादा तर लोग अनुभव नहीं किये हैं हमारे पूर्वज किये होंगे {दादा, परदादा (grandfather) } । ना अपने सामने फसल का संकट है, ना लगान भरने का संकट है, ना भूख का संकट है, ना गरीबी का इतना बड़ा संकट है ।  लेकिन एक कनेक्टिविटी की गुजारिश आपसे करूंगा जैसे जब आप और कोई मूवी देखते हैं एग्जांपल के लिए अवेंजर, स्पाइडर मैन , इस मूवी से आपका क्या कनेक्टिविटी है और आप कितना जानते हैं फिर भी आप जुड़ जाते हैं आप एक अलग यु...